बीकन बोले चांगला

 

बी आर ओ की अग्रणी परियोजना बीकन की स्थापना 18 मई 1960 को हुई थी और इसका मुख्यालय श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) में हैं । स्थापना के समय इस परियोजना के कमान के अधीन तीन कृतिक बल, 5 सी00कृ00, 6 सी00कृ00 तथा 9 सी00कृ00 थे । इस परियोजना के प्रथम मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर बी पी वधेरा थे जिन्होंने अभिप्रेरक स्लोगन बीकन बोले चांगला बनाया था ।

 

इस परियोजना को सोनामार्ग-कारगिल-लेह, लेह-कारू-उप्सी-लोमा-दुंगति-चुसुल, कारू-टंगटसे-चुसुल, दुंगति-देमचौक तथा तुंगस्ते-लुकुंग-फोबरंग 1250 कि0मी0 लंबी सड़कों के विकास का कार्य सौंपा गया था । तद्पश्चात परियोजना को पूरे जम्मू व कश्मीर राज्य की सड़कों का विकास कार्य सौंपा गया । तत्पश्चात लेह-उप्सी-सरयू सड़क का दायित्व भी बीकन परियोजना को दिया गया । कार्य अधिक होने के कारण 2 और कृतिक बल 16 सी00कृ00 तथा 20 सी00कृ00 इनके कमान के अधीन दिए गए ।

 

बीकन परियोजना के बढते कार्यक्षेत्र के दायरे तथा प्रगतिशील सड़कों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए 01 जनवरी 1975 को संपर्क परियोजना खड़ी की गई जिसका मुख्यालय जम्मू में स्थित  है । संपर्क परियोजना को जम्मू-रजौरी-पुंछ सेक्टर में सड़कों का सुधार तथा विकास कार्य सौंपा गया । 1984 में ओ पी मेघदूत लांच होने के पश्चात् बीकन परियोजना एक बार पुनः विभाजित हो गई तथा से लद्दाख क्षेत्र के लिए हिमांक परियोजना की स्थापना की गई ।  

 

बीकन परियोजना को जम्मू कश्मीर की जीवन धारा ("Life line of J & K") के नाम से जाना जाता है । यद्यपि इसका प्रारंभ बी आर ओ की मुख्य निर्माण एजेंसी के रूप में हुआ था, बीकन परियोजना जम्मू कश्मीर की जनता की आंकांक्षाओं तथा सेना की सामरिक आवश्यकताओं को पूरा कर रही है । दूरवर्ती तथा दुर्गम क्षेत्र, प्रतिकूल मौसम तथा विषम परिस्थितियों, संवेदनशील इलाके में इस परियोजना द्वारा 4000 कि0मी0 सड़कों का निर्माण कर  जम्मू व कश्मीर में सड़कों के मूलभूत विकास में योगदान दिया है । परियोजना द्वारा न केवल राज्य के विभिन्न भागों को जोडा गया है बल्कि लगभग 10,000 स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए है और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान दिया है ।

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