श्री एस के पाण्डेय
अधीक्षण अभियंता (सिविल)
स्था. मुख्य अभियंता

 

सेतुक परियोजना की स्थापना सितंबर 1989 में देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष रूप से बड़ी नदियों पर पुल बनाने के लिए की गई थी । इसका नाम संस्कृत के शब्द सेतु पर रखा गया था जिसका अर्थ पुल है । इस परियोजना को बाद में सड़क एवं भवन जैसी अन्य निर्माण गतिविधियों की जिम्मेवारी भी सौंपी गई । यह परियोजना मेघालय, असम और त्रिपुरा राज्यों में सड़कों के विकास एवं रखरखाव के कार्य देख रही है । इस परियोजना का मुख्यालय त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में स्थित है ।

 

राष्ट्रीय राजमार्ग 44 जो त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, दक्षिणी असम एवं दक्षिणी मेघालय राज्यों की जीवन रेखा है, को इस परियोजना द्वारा दुष्कर पहाड़ी क्षेत्र, निरंतर वर्षा और विद्रोह की समस्या के बावजूद वर्ष भर वाहनों के यातायात के लिए खुला रखा जा रहा है ।

 

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सड़कों एवं फेनसिंग के महत्वपूर्ण कार्यों का निर्माण भी इस परियोजना द्वारा किया जा रहा है । करीमगंज से सुतारकंढी और राधना बाजार को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 51 जिसका रखरखाव इस परियोजना द्वारा किया जा रहा है, भारत बांग्लादेश के बीच व्यापार का मुख्य रूट है । त्रिपुरा के मनु से मिजोरम के सैरांग के बीच एन एच 44 का भाग सेतुक परियोजना के अंतर्गत एक अन्य महत्वपूर्ण सड़क संपर्क है ।  

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