सामान्य

चेतक कई तरह से शानदार परियोजना है । इस परियोजना में सेवारत विशिष्ट तीन कमान अर्थात् पश्चिमी, दक्षिण पश्चिमी तथा पश्चिमी है । वर्तमान में इसका कार्यक्षेत्र तीन राज्यों में राजस्थान, पंजाब तथा गुजरात में फैला हुआ है । चेतक ही एकमात्र ऐसी परियोजना है जिसकी स्थापना केवल एक राज्य में हुई थी अर्थात उत्तर प्रदेश के गढ़वाल हिमालय में जो अभी (उत्तराखंड) और कुछ वर्षों के पश्चात दूसरे राज्य अर्थात राजस्थान जो महान महाराणा प्रताप की भूमि है उसके पौराणिक अश्व चेतक के नाम से इस परियोजना का नाम रखा गया है ।


प्रारंभिक स्थापना

1955 में पंचशील समझौते के हस्ताक्षर के तुरंत पश्चात उत्तर प्रदेश हिमालय के बाराहुति में निता पास तथा शिपकी के पार चीनी घुसपैठ से इंडिया चीन सीमा पर तनाव का माहौल बन गया जिससे सेक्टर में सैन्यतंत्र की सहायता के लिए दूसरा रास्ता बनाने की आवश्यकता महसूस की गई । इसलिए जोशीमठ-मालारी-रिनकिन सड़क के निर्माण के लिए जून 1962 में चेतक परियाजना की स्थापना की गई । अक्तूबर-नवंबर में चीन के आक्रमण के दौरान ऋषिकेश-जोशीमठ मार्ग पर  संचार व्यवस्था बहाली के लिए चेतक परियोजना द्वारा सेना की सहायता की गई । इस श्रमसाध्य कार्य और निर्माण कार्यों की शीघ्रता से मानवीय जीवन में भारी परिवर्तन हुआ । इस परियोजना द्वारा प्रसिद्ध तीर्थस्थान ऋषिकेश से बद्रीनाथ का मार्ग विकसित किया गया और उसका उद्घाटन जून 1965 में  श्री वाई पी चवन रक्षा मंत्री द्वारा किया गया था । 1966 में टनकपुर-तवाघाट सड़क खोली गयी जिससे माउंट कैलाश तथा तिब्बत की पवित्र झील मानसरोवर के लिए तीर्थयात्रियों को सुविधाएं प्राप्त हुई । परियोजना को सौंपे गए कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा होने के पश्चात् इस परियोजना को दिसंबर 1966 में बंद कर दिया गया ।


पुनः स्थापना

इंडिया-पाक के 1971 के युद्ध तथा दीपक परियोजना को अत्यधिक जिम्मेदारियों से कार्यमुक्त करने तथा राजस्थान तथा पंजाब राज्यों के सड़क नेटवर्क के विस्तार व सुधार तथा डिटच कम बडस के लिए अप्रैल 1980 में चेतक परियोजना को पुनः खड़ा किया गया । इसका मुख्यालय बीकानेर में  है । इस परियोजना के प्रथम मुख्य अभियंता कर्नल बी सी पाठक (जो बाद में ब्रिगेडियर से सेवानिवृत्त हुए) थे ।

जलवायु एवं पर्यावरण

चेतक परियोजना के कार्यों का दायित्व रेगिस्तान की अनूठी विशेषता है । वहाँ तापमान गर्मियों में 500 सेल्सियस से ऊपर तथा सर्दियों में 00 से नीचे चला जाता है । गर्मियों में रेतीले तूफानों के कारण दृश्यता 00 तक पहुँच जाती है । जैसलमेर का क्षेत्र (देश का सबसे बड़ा जिला है) तथा बाड़मेर छिटपुट आबादी वाला है लेकिन गर्मियों के दौरान यहाँ बहुत अधिक पर्यटक आते हैं । इस बंजर रेगिस्तान में स्थानीय लोगों का मुख्य व्यवसाय गाय, बकरियां तथा भेड़ें पालना है जो झाड़ियों पर जीवित रहती है । इंदिरा गाँधी नहर के निर्माण के पश्चात् श्रीगंगानगर तथा बीकानेर के जिले हरे-भरे हो गए हैं । राजस्थान में अधिकतर क्षेत्र हरा-भरा  है । रेतीले तूफानों के साथ विषम जलवायु, रेतीले टीलों को इधर से उधर जाना तथा पानी की कमी अन्य स्थानीय संसाधनों के अभाव के कारण ऐसे में कार्य करना अत्यधिक मुश्किल हो जाता है । परियोजना के अधीन कई सड़के राजस्थान में थार रेगिस्तान से होकर गुजरती है । रेतीले क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण कार्यानुभव ने गहन अंतःकरण में आजीवन व्यावसायिक संतुष्टि प्रदान करने वाली एक अमिट छाप छोड़ी है ।


उपलब्धियां

हमारा हमेशा से यह प्रयास रहा है कि हम नये जोश से आगे बढ़े और गौरवशाली ढंग से कार्य पूरा करें । वर्तमान में 240 कि0मी0 महत्वपूर्ण डी सी बी कार्य के अलावा परियोजना द्वारा           4500 कि0मी0 से भी से अधिक सड़क निर्माण तथा मरम्मत का कार्य किया जा रहा है । परियोजना ने निर्धारित समय में विभिन्न एजेन्सियों के लिए उपभोक्ता की संतुष्टि के साथ अनेक गौरवशाली एवं महत्वपूर्ण कार्य किए हैं । परियोजना द्वारा किए गए कुछ मुख्य कार्य निम्नलिखित हैः-

क.    राष्ट्रीय राजमार्ग 4बी को चार लेन और जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट नवीं मुंबई के लिए कंटेनर यार्ड क्षेत्र का निर्माण ।

 

ख.    पुणे एयर फील्ड और नेवल एयर फील्ड, गोवा के लिए पुनः सतहीकरण कार्य

 

ग.    मारमूगाओ पोर्ट ट्रस्ट के रा.रा. 17बी पर 18 कि0मी0 तक फोर लेन राजमार्ग का निर्माण

 

घ.    पंजाब में गुरदारसपुर, बटाला और पटियाला बाईपास तथा राजस्थान में जोधपुर बाईपास निर्माण कार्य

 

च.    अजनाला-लोपोके-सोहल मार्ग के साखी नाला पर 60 मी0 लंबा पुल तथा गंदा नाला पर 49 मी0 लंबे पुल का निर्माण

 

छ.    सूरतगढ़-अनूपगढ़ सड़क पर बने पुल का पुनर्निर्माण

 

ज.    हतमा में संयुक्त वायुयान स्थल का निर्माण

 

झ.    हुसैनवाला में दो नहरों पर 115 मी0 लंबे पुल के निर्माण कार्य

 


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