पूर्वी हिमालय में बसा भूटान एक सुंदर देश है । इसकी बर्फ से ढकी चोटियां, अशांत नदियाँ, उच्च तुंगता पर फैली हरी-भरी घाटियां खड़े पहाड़ी क्षेत्र तथा घने जंगल अद्भुत भू-दृश्य पैदा करते हैं । भूटान का क्षेत्रफल 46,620 वर्ग कि0मी0 हैं और यह उत्तर में बाहरी हिमालय तथा दक्षिण में भीतरी हिमालय की समांतर श्रृंखलाओं के बीच पड़ता है । इसके उत्तरी क्षेत्र में वार्षिक वर्षा में 500 एमएम से 2000 एमएम तथा दक्षिणी क्षेत्र में 2000 से 5000 एमएम के मध्य विविधता पाई जाती है । इसकी दक्षिणी श्रेणियां ऊबड़-खाबड़ घाटियां हैं जिनका अवतरण भूटान की मुख्य नदियों अमोचु (तोरसा), बांगचु (रैडक), मोचु (संकोश) तथा दोंगमें चु (मनास) से हुआ है जो ज्यादातर उत्तरी-दक्षिणी दिशा में बहती हैं और बर्फ से उत्पन्न होने  के कारण मानसून के महीनों के अलावा शेष समय भी वेग से बहती है । यह पहाड़ों से होकर उत्तर-दक्षिण दिशा में बहते हुए 6000 मीटर की ऊँचाई से भारत-भूटान सीमा के नजदीक गिरिपीठ तक उतरती है ।

 

वर्ष 1960 के अंत तक भूटान योजनाबद्ध सामाजिक एवं आर्थिक विकास की आवश्यकता को महसूस कर चुका था । अतः जुलाई 1961 में भूटान के राजा स्वर्गीय जिगमें दोरजी वांगचुक ने प्रथम पंचवर्षीय योजना (1961-1966) आरंभ की । अब तक भूटान में वाहन योग्य कोई भी सड़क नहीं   थी । यह केवल पैदल पथ एवं खच्चरों के रास्तों से जुड़ा हुआ था । क्योंकि सड़कें एवं परिवहन प्रणाली किसी भी देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं अतः भूटान की प्रथम तीन पंचवर्षीय योजनाओं में इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई । सड़कों के विकास के लिए जारी किया गया कुल अनुदान प्रथम पंचवर्षीय योजना में 58.7%, द्वितीय पंचवर्षीय योजना में 34.9%, तृतीय पंचवर्षीय योजना में 17.8%, चतुर्थ पंचवर्षीय योजना में 11.6%, पंचम पंचवर्षीय योजना में 15.3%, छठी पंचवर्षीय योजना में 9.3%, सातवीं पंचवर्षीय योजना में 7.8%, था । इस पृष्ठभूमि में ही दंतक परियोजना अस्तित्व में आई ।

 

दंतक परियोजना की स्थापना मई 1961 में पूर्वी भूटान के समद्रुप जोंकार में हुई थी । इसकी साधारण सी शुरूआत बांस की झोपड़ियों एवं घास-फूस की छतों से की गई थी । तब से अब तक दंतक परियोजना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है । इसने न केवल सड़कों और दूरसंचार की व्यवस्था का विस्तार कर भूटान के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है बल्कि पूरे भूटान में अन्य प्रतिष्ठित कार्यों को भी पूरा किया है । इन वर्षों में दंतक परियोजना ने भूटान में 1500 कि0मी0 सड़कों, पारो एवं यांगफुला हवाई पट्टियां, अनेक हेलीपैडों, दूर-संचार नेटवर्क, भारत-भूटान माइक्रोवेव लिंक, भूटान आकाशवाणी केंद्र, प्रतिष्ठित इंडिया हाउस परिसर, चुक्खा जल विद्युत आवासीय परिसर, जल विद्युत केंद्र, रिवर प्रशिक्षण कार्य, स्कूल एवं कॉलेजों का निर्माण कार्य किया है । पूरे किए गए कार्यों की सूची का कोई अंत नहीं है और उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इसमें कोरिचु जल विद्युत परियोजना, दुंगसुम सीमेंट संयंत्र तथा ताला जल विद्युत परियोजना के मूलभूत ढांचों के कार्य भी इसमें जुड़ जाएंगे ।

 


 

 

वर्ष 1995-96 के दौरान परियोजना में अनेक कार्य संपन्न हुए । पूर्वी भूटान में वृहदाकार पेट्रोलियम भंडारण की स्थापना के कार्य को पूरा कर फरवरी 1996 में आर जी ओ वी को हस्तांतरित किया गया । पश्चिमी भूटान में पारो एयर कंट्रोल टावर को द्रुक सिविल एविएशन को सौंपा गया । थिंपु में दो पुलों का निर्माण करके आर जी ओ वी के लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया  गया ।

 

वर्ष 1996-97 में दंतकियों को प्रकृति के प्रकोप से लड़ना पड़ा । पुंछलिंग-थिंपु राजमार्ग पर सोचन स्लाइड ने मनुष्य की सहनशक्ति एवं तकनीकी कुशलता को चुनौती खड़ी कर दी । अंततः स्खलन प्रभावित क्षेत्र को 120 फुट लंबे बेली ब्रिज के निर्माण से जोड़ा गया । यह उपलब्धि अब भी उन लोगों के जेहन में ताजा है जिन्होंने दंतक को समय की मांग देख थिंपु की जीवन रेखा को बहाल करने के लिए दिन-रात कार्य करते देखा हैं । सिबसू-टेंडु तथा देवथांग-भंगतर सड़कों के निर्माण कार्य को योजना अनुसार समय पर पूरा किया गया है । 

Back