ब्रिगेडियर बिरेन्द्र सिंह
मुख्य अभियन्ता

पुष्पक परियोजना की स्थापना मई 1967 में मूल रूप से मिजोरम राज्य में सड़कों के विकास की गतिविधियों को बढ़ाने व उसमें तेजी लाने के लिए की गई थी । पूर्व का वंडर �'र्चिडसीमा सड़क संगठन की एक सबसे बड़ी परियोजना है और वह मिजोरम तथा असम के दक्षिणी कच्छार क्षेत्र में परिवेष्टित सड़कों के विकास एवं रखरखाव के लिए उत्तरदायी है ।

 

पुष्पक परियोजना एन एच-53, एन एच-54 तथा जनरल स्टाफ, पूर्वोत्तर परिषद एवं गृह मंत्रालय द्वारा आवंटित निधि की अनेक सड़कों के निष्पादन का कार्य करती है । पुष्पक परियोजना ने उधारबंद-जटिंगा, सीलिंग-तिपाईमुख, सरचिप-थेंजावल, फैलांग-मारपारा तथा कावलकुल्ह-मिमवंग जैसी मुख्य सड़कों के कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर राज्य लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया है । राज्य के सबसे कठिन क्षेत्र में स्थित एवं मिजोरम के सबसे बड़े 285 मीटर लंबे कालादन पुल का निर्माण परियोजना के नाम एक और उपलब्धि है । परियोजना मिजोरम में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सड़कों एवं फेसिंग के निर्माण कार्यों को भी मुस्तैदी से करने में लगी है ।

 

पुष्पक परियोजना ने 1971 में बांग्लादेश आपरेशन, संचार व्यवस्था स्थापित करने व इसकी पुनः बहाली में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । प्रतिकूल क्षेत्र, बाढ़ों की बारंबारता, सीमित कार्यावधि, मौसम की विकट परिस्थितियों जैसी चुनौतिपूर्ण बाधाएं भी पुष्पकियन को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से कभी नहीं रोक पाई हैं । मिजोरम में पुष्पक का नाम हर घर में लिया जाता है जो इस कहावत को चरितार्थ करता है कि मिजोरम एवं पुष्पक एक दूसरे के लिए बने है ।






























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