ब्रिगेडियर डी एस रावत

मुख्य अभियंता

 

यह परियोजना जुलाई 1961 में दीमापुर के नागा हिल त्युनसांग क्षेत्र (एनएचटीए) में खड़ी की गई । इस परियोजना को नागालैंड, मणिपुर, मिजो हिल तथा लोहित डिवीजन के नेफा क्षेत्रों का दायित्व दिया गया । वर्तमान में इस परियोजना को नागालैंड, मणिपुर, असम तथा म्यांमार की सड़क निर्माण का दायित्व दिया गया है ।

 

म्यांमार में तामू-कालेम्यो-कलेवा में 160 कि0मी0 प्रतिष्ठित सडको का निर्माण कार्य 03 वर्षों में रिकॉर्ड समय पर पूरा करना,  दीमापुर से मारम तक एनएच-29, जेसामी से येगेंगपोकपा तक एन एच-202, चूरनचांदपुर से तिपाईमुख तक एनएच-02, उखरूल से टोलोइ तक एनएच-102ए सडकों का निर्माण, दोहरीकरण तथा अनुरक्षण कार्य, मरम-पेराम, एन ई सी सड़क महादेव-कैंप-टोलोइ पर विशेष त्वरित सड़क विकास परियोजना के कार्य, सेनापथी-फाईबुंग सड़क पर डी ओ एन ई आर कार्य इस परियोजना के कार्यों की मुख्य उपलब्धियां हैं ।

 

लिकिमरो हाइडल परियोजना के निर्माण कार्यों के अलावा किकरी में सेटलाइट स्टेशन, रंगापारा में इनफेंटरी बटालियन तथा इंफाल में मणिपुर पुलिस के लिए आवास निर्माण, लीमाकॉग में हेलीबेस, कोहिमा में राजभवन विस्तार तथा कैथलमानबी में असम राइफल्स के लिए टाउनशिप इत्यादि ऐतिहासिक कार्यों का निर्माण परियोजना द्वारा किया गया हैं ।

 

परियोजना ने अपनी समर्पण सेवा द्वारा नियमतः नाम ऊँचा किया है तथा नागालैंड एवं मणिपुर दोनों राज्यों में सेना तथा वहां के लोगों के लिए संचार व्यवस्था सुचारू रूप से बनाए रखी ।

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