यह परियोजना 01 जून 1990 को डुमडुमा असम में खड़ी की गई ।  बी आर ओ की यह परियोजना देश के अति पूर्वी छोर में स्थित हैं । इस परियोजना के अधीन  48 सी00कृ00 तथा 752 सी00कृ00 शक्तिशाली कार्यकारी इकाइयां है जो सभी आवश्यक कार्यों को पूरा करती है तथा परियोजना के उददेश्य ("Committed to Connectivity") को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है ।

 

1260 कि0मी0 सड़कें जिनमें आईसीबीआर, जीएस, एनएच शामिल है के अलावा उदयक परियोजना बीआरओ में पुल निर्माण में सबसे अग्रणी रही जिससे 2013 में सबसे अधिक कार्य निर्माण कर दिखाया है । परियोजना के पास सिकू, पासीघाट, नोयडिंग, ब्रह्मकुंड, सीमेन तथा दिगारू (लंबे विभागीय पुल) है जिनमें कुछेक पुल परियोजना द्वारा निर्मित है ।

 

वर्ष के दौरान बर्फ पिघलने से आने वाली कठिनाइयों तथा लंबे मानसून के कारण दिवांग तथा लोहित घाटी में संचार व्यवस्था खुली रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते  हैं । यह परियोजना प्रयोगकर्ता की आवश्यकताओं को पूरा करने में तैयार रहती है तथा अपना नारे ("Committed to Connectivity") के अनुरूप ही कार्य करती है ।

 

परियोजना द्वारा सभी 07 प्रतिष्ठित आईसीबीआर सड़कें पूर्ण कर जोड़ दी गई हैं । हायूलियांग-मेटेग्लियांग-चाग्लोहागम सड़क 2013-14 में जोड़ी गई है ।

 

पूर्वी अरूणाचल प्रदेश के सुदूर क्षेत्र में उदयक परियोजना का उगता सूरज आशा और प्रगति का प्रतीक है । इस दूरवर्ती इलाके में नवीकरण विकास के साथ उदयक परियोजना अरूणाचल में मूलभूत ढांचे के विकास के प्रतिबद्ध हैं ।

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