जम्मू और कश्मीर में सीमा सड़क संगठन के हमेशा से बढ़ते कार्यभार के कारण विशेष रूप से लद्दाख में सड़क निर्माण ढ़ाचों के विकास के लिए हिमांक परियोजना अगस्त 1985 में स्थापित की गई । इस परियोजना का कार्य न केवल लद्दाख में अपितु सैन्य दृष्टि से संवेदनशील सियाचीन सेक्टर में भी वर्ष भर संचार माध्यमों को खुला रखने के लिए संसाधनों को प्रदान कराना  है । कठोर भूभाग और विषम जलवायु परिस्थितियों से लड़ते हुए, चार माह के छोटे कार्य सत्र के साथ जम्मू और कश्मीर के लद्दाख जिले में हिमांक ने स्वयं के लिए लक्ष्य स्थापित कर वास्तव में दी माउण्टेन टेमर्स के खिताब का सही हकदार बना है ।

 

      हिमांक परियोजना को संसार के तीन सबसे ऊँचे मार्गों अर्थात् खरदुंगला, टेंगलांगला और चांगला में सड़कों के रखरखाव और सुधारने की विशेष योग्यता हासित है । खरदुंगला में संसार के सबसे ऊँचे बेली पुल का निर्माण किया गया जिसे बाद में पक्के पुल का रूप दिया गया । मई 99 के पहले सप्ताह में ऑपरेशन विजय के लिए लेह तथा कारगिल मार्ग को खोलने में हिमांक का अनूठा योगदान रहा है । कारगिल युद्ध में ऑपरेशन की जरूरतों में सेना स्तर की बैठकों के लिए यह आवश्यक था ।

     

मुख्यालय हिमांक का स्मारक उन हिमांकवासियों के सर्वोच्च बलिदान को स्वीकार करता है जिन्होंने हिमाच्छादित हिमालय की घुमावदार ऊँचाईयों में राष्ट्र के प्रति कर्त्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर किए हैं । हिमांक परियोजना उनके साहस और समर्पण को नमन करता है ।

 

परियोजना समाचार

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